You are here
Home > Moral Stories > 10+ Short Moral Stories in Hindi | 10+ शिक्षाप्रद कहानियां

10+ Short Moral Stories in Hindi | 10+ शिक्षाप्रद कहानियां

Short Moral Stories in Hindi

Short Moral Stories in Hindi कहानियों का ऐसा संग्रह जहाँ आपको मिलता है एक से बढ़कर एक लघु कथाए और लघु कहानिया |

“क्या आपको कहानिया पढना अच्छा लगता है?” लेकिन आपके पास बड़ी-बड़ी कहानियाँ पढ़ने के लिए वक्त नहीं है तो ये लघु कथाये सिर्फ आपके लिए है यह आपको मिलेगा 300 वर्ड से कम की कहानियाँ |

हम उम्मीद करते है आपको हमारी Short Moral Stories in Hindi का संग्रह पसंद आयेगा तो चलिये दोस्तों शुरू करते है आज की Short Moral Stories in Hindi.


10+ Short Moral Stories in Hindi

चीकू चूहा 

एक बार की बात है एक जंगल में जंगल के राजा शेर व अन्य सभी जानवर रहते थे और सभी एक दुसरे के साथ बहुत खुश रहते थे उसी जंगले में एक चीकू नाम का एक चूहा रहता था जो बहुत ही प्यारा था |

एक दिन चीकू चूहा जंगल की सैर के लिये निकला था वो जंगल की आनंद लेते हुए ही ख़ुशी के साथ जा रहा था तभी उसके सिर में एक बेर का फल आ गिरा |

चीकू चूहे ने समझा की लगता है आसमान गिर रहा है और वो इसे से डरकर भागने लगा और उसने सोंचा की वो ये बात शेर राजा को बताएँगे तो वो इस समस्या का हल जरुर निकालेंगे और सभी जानवर को इस मुसीबत से बचा लेंगे |

चीकू चूहे को बहुत तेज भागते देखकर हिरन ने पूछा – क्या हुआ प्यारे चीकू भाई तुम इतना तेज क्यों भाग रहे हो ?

चीकू चूहा हांफते हांफते बोला – अरे भाई आसमान गिर रहा है और ये बात मैं शेर राजा को बताने जा रहा हूँ |

यह सुनते ही हिरन भी चीकू चूहे के साथ भागने लगा तभी रास्ते में उन्हें खरगोश और बत्तख मिले और उन दोनों ने भी वही सवाल पूछे की चीकू भाई तुम दोनों क्यों भाग रहे हो ?

चीकू फिर बोला आसमान गिर रहा है और ये बात हम दोनों शेर राजा को बताने जा रहे है | यह बात सुनकर खरगोश और बत्तख भी डर गये और वो भी उनके साथ भागने लगे |

कुछ देर बाद सभी शेर राजा के पास पहुँच गये और चीकू ने सारी बात राजा को बताई यह सुनकर शेर राजा बोला की – तुम हमें उस जगह पर ले चलो जहा तुमने आसमान को गिरते देखा था |

चीकू चूहा सभी को वहां ले चला तो देखा वहां कुछ नहीं था तभी एक बार फिर एक बेर का फल चीकू के सिर में गिरा और चीकू ने जोर से चिल्लाया भागों आसमान गिर रहा है | सभी समझ गये थे चीकू को गलतफैमी हुई थी और सभी जोर जोर से हंसने लगे |

Short Moral Stories in Hindi शिक्षा :- हमें कभी भी किसी बात को जांचे परखे बिना किसी को नहीं बतानी चाहिए |


चींटी और टिड्डा 

गर्मियों का दिन था कुछ ही दिन में गर्मी ख़त्म होकर शर्दियाँ आने वाली थी | वही एक तरफ एक टिड्डा मौसम का आनंद उठाते हुए झूम रहा था और नाच गा रहा था । तभी वही दूसरी तरफ से एक चींटी एक मक्के का दाना उठाकर अपने घर ले जा रही थी।

यह देख टिड्डे ने उस चींटी से कहा – “ अरे ओ चींटी रानी कहाँ जा रही हो इस मक्के के दाने को लेकर ? इतना अच्छा मौसम है… आओं नाचे गाये और मौज मस्ती करें ”

चींटी ने कहा – “ नहीं टिड्डे भाई, मैं अपने और अपने बच्चों के लिए सर्दियों के मौसम के लिए भोजन इकट्ठा कर रही हूँ। बहुत काम बांकी है… मुझे माफ़ क्र देना मैं नहीं रुक सकती ”  

इसे भी पढ़े – अजनबियों से बात करने के 7 नियम | How To Start A Conversation With A Stranger

टिड्डे ने एक बार फिर कहा – “ अरे बहन चींटी रानी तुम सर्दियों की चिंता क्यों करती हो? अभी तो सर्दियाँ आने में बहुत समय शेष है “ परंतु चींटी मुस्कुराकर वहां से चली गयी क्यूंकि उन्हें अपना कार्य पूरा करना था |

कुछ दिन बाद ही सर्दियाँ आ गईं। और इस वक्त टिड्डे के पास खाने के लिए शेष कुछ नहीं बांकी था जबकि वही चींटी अपने इकट्ठे किए हुए मक्के व अनाज को आराम से बैठकर अपने बच्चों के साथ खा रही थी।

यह सब देखकर टिड्डे को अपनी गलती का अहसास हो गया |

Short Moral Stories in Hindi शिक्षा :- परिश्रम से आज किये गये कार्य का फल आने वाले समय में जरुर मिलता है |


गंजा व्यक्ति और मक्खी की कहानी 

कुछ समय पहले की बात है सीतापुर नाम का एक गाँव था वहां एक गंजा व्यक्ति रहता था | एक दिन गर्मी की दोपहर थी। वो गंजा व्यक्ति अपने कार्य से थककर आराम करने के लिए बैठा था तभी एक मक्खी न जाने कहीं से उड़ती हुई आई और उस गंजे व्यक्ति के आस-पास मंडराने लगी।

वो गंजा व्यक्ति उस मक्खी को उड़ाता पर वह मक्खी उसके माथे पर बैठ जाती और उसे कांटने लगती | मक्खी से परेशान होकर उसने जोर से मारा परंतु मक्खी तो उड़ गयी लेकिन उस गंजे व्यक्ति की हाँथ से उसका सिर जोर से लगा |

कुछ देर बाद वह मक्खी फिर से उसके सिर में बैठकर उस गंजे को काटने लगी | एक बार फिर उस व्यक्ति ने मारा लेकिन मक्खी इस बार भी बच गयी |

मक्खी कुछ देर तो शांत रही लेकिन कुछ देर बाद फिर से भिनभिनाना शुरू कर दिया | वो गंजा व्यक्ति समझ गया था और उसने कहा – “ शत्रुओं पर ज्यादा ध्यान देने से व्यक्ति खुद का ही नुकसान करता है इससे अच्छा है उनपर ध्यान नहीं देना ” थोड़ी देर बाद मक्खी खुद-ब-खुद उड़ कर कंही और चली गयी |

Short Moral Stories in Hindi शिक्षा :- शत्रुओं पर ध्यान देने से हम उनको बढ़ावा देते है और इसी के चलते हम खुद का ही नुकसान कर बैठते है |


बेवकूफ नीलकंठ  ( Short Moral Stories )

बहुत समय पहले की बात है… एक नीलकंठ बहुत सारे मोरों को नाचता देख रहा था । नीलकंठ मोरों की सुंदरता व सुन्दर पंखों को देखकर मोहित हो गया था | मोरों के जाने के बाद वह उस जगह में गया जहां पहले मोर नाच रहे थ |

नीलकंठ ने वहां मोरों के बहुत सारे गिरे हुए पंख देखे और नीलकंठ ने सोचा यदि मैं भी इन पंखों को अपने शरीर में लगा लूं तो मैं भी मोरों की तरह सुन्दर बन जाऊंगा |

यह सोंचकर उसने सभी पंखों को वहा से उठाया और अपनी पूंछ में बांधने लगा | और बांधने के बाद वो नीलकंठ नाचता हुआ मोरों के बीच जा पहुंचा |

यह देखकर मोरों को बहुत अजीब लगा और उन्हें पता चल गया था ये कोई बहरूपिया है और सभी मोर उसे चोंच मारने लगे | मोरों के द्वारा चोंच मारने वो नीलकंठ द्वारा बचने के प्रयास में बांधे हुए सारे पंख गिर गये |

इसे भी पढ़े – Short Moral Stories In Hindi | घूँघट वाली बहू

वही दूर से नीलकंठ के दोस्त यार यह सभी तमाशा देख रहे थे । नीलकंठ बहुत दुखी होकर व अपमानित होकर अपने दोस्त यार के पास पहुंचा ।

सभी उस नीलकंठ से बहुत नाराज थे और उन्होंने कहा – “ सुन्दर पक्षी बनने के लिये सिर्फ बाहरी सुन्दरता काफ़ी नहीं दिल से मन से भी सुन्दर होना जरुरी है प्रभु ने सभी को अगल–अलग सुन्दरता दी है ”

Short Moral Stories in Hindi शिक्षा :- ईश्वर ने सभी जिव जंतु को अलग-अलग खूबसूरती से नवाजा है में दूसरों की नक़ल नहीं करनी चाहिए |


बिल्ली और चूहे की कहानी

एक समय की बात है एक मकान में बहुत सारे चूहे रहते थे और वो सभी अपनी अपनी जिंदगी में बहुत खुश थे । एक दिन कहीं से एक बिल्ली उस मकान में आ गई।

बिल्ली से बचने के लिए चूहों के मुखिया ने सभा बुलाई और सभी छोटे बड़े चूहे उस सभा में एकत्रित हुए सभी ने अपने-अपने राय दिए |

एक छोटे चूहे ने कहा – “हमें एक घंटी लानी चाहिए और उस घंटी को बिल्ली के गले में बांध देना चाहिए जिससे वह जहाँ भी जाएगी हमें घंटी की आवाज़ से पता चल जाएगा।”

तभी एक मुखिया चूहे ने कहा – “सलाह तो सही है पर उस खतरनाक बिल्ली के गले में घंटी बाँधेगा कौन?” सभी चूहे एक दूसरे की ओर देखने लगे पर किसी को नहीं सुझा की इस काम को कैसे अंजाम दिया जाये |

Short Moral Stories in Hindi शिक्षा :- कठिन कार्य कहना जितना आसान होता है करना उतना ही मुश्किल |


बकरी और चालाक लोमड़ी की कहानी

एक बार की बात है एक जंगल में बहुत से जानवर रहते थे और उसी जंगल में चीकू नाम का चालक और चतुर लोमड़ी भी रहता था | उस जंगल के बीचों-बीच एक कुआँ था जो ज्याद गहरा नहीं था और कुए के चारो ओर दिवार भी नहीं थी |

एक दिन लोमड़ी उधर से घूमते-घूमते उस कुए में गिर गयी और बाहर आने का प्रयास करने लगी पर बाहर नहीं आ पा रही थी | उसने अपना पूरा दम लगाया पर असफल रही उसने निरास होकर प्रयास करना बंद कर दिया और वही बैठ गयी |

तभी कुए के पास से एक बकरी की आवाज़ आयी और चीकू लोमड़ी चौकन्ना हो गया और बकरी की भी नजर चीकू पर गयी और बकरी ने पूछा – “अरे भाई चीकू तुम कुए के निचे क्या कर रहे हो |”

तभी चीकू ने चालाकी लगते हुए कहा – “ अरे बकरी बहन क्या तुम्हे नहीं पता बहुत जल्द ही बहुत सुखा पड़ने वाला है कुए के बाहर कंही पानी नहीं होगा इसलिए मैंने सोंचा की किसी और के यहाँ अन्दर आने से पहले मैं ही चला जाता हूँ जिससे मैं प्यास से तो नहीं मरूँगा |

चीकू लोमड़ी ने बकरी से फिर कहा – “ अगर तुम चाहो तो तुम भी यहाँ आ सकती हो यहाँ बहुत पानी है हम प्यासे नहीं मरेंगे |”

बकरी ने सोंच की चीकू जो कह रहा है वो सही है वो अपने साथ-साथ मेरे बारे में भी सोंच रहा है जो बहुत अच्छा है | इतना सोंचने के बाद बकरी कुए में कूद गयी |

जैसे ही बकरी कुए में गयी चीकू झट से बकरी की पीठ में चढ़ गया और वहां से छलांग लगाकर बाहर निकल गया और वहां से भाग गया और बकरी वही फंसी रह गयी |

Short Moral Stories in Hindi शिक्षा :- आंखे बंद करके विश्वास करने से हमेशा हानि ही होता है |


भूखी लोमड़ी ( Short Moral Stories )

बहुत समय पहले की बात है एक जंगल में एक लोमड़ी रहता था और उस लोमड़ी को बहुत भूख लगी थी इसलिए वो जंगल में भोजन की तलाश में इधर-उधर घूम रही थी |

गर्मी और भूख से परेशान लोमड़ी को थोड़ी दूर पे एक अंगूर का बाग़ नजर आया और वो दौड़ पड़ी अंगूर खाने के लिए पर उसने वहां जाकर देखा की अंगूर उसकी पहुँच और सोंच से ज्यादा ऊपर निकली |

अंगूर के गुच्छे को देखकर लोमड़ी के मुह में पानी आ रहा था | लोमड़ी मन ही मन सोंच रहा था की अगर ये अंगूर के गुच्छे मुझे मिल जाये तो मेरा भूख ही ख़त्म हो जायेगा और इसे खाकर बहुत मजा भी आयेगा |

उस लोमड़ी ने अंगूर तक जाने के लिए बहुत प्रयास किया परन्तु पहुँच नहीं पाई लोमड़ी बेचारी उछल-उछल कर थक गयी लेकिन अंगूर का एक फल भी उसके मुह नहीं लगा |

इसे भी पढ़े – Competitive Exam की तैयारी कैसे करें | How To Prepare Competitive Exam In 2020

लोमड़ी हर बार से ज्यादा ताकत लगती लेकिन हर बार उसको नाकामयाबी का ही स्वाद चखना पड़ता |

बहुत प्रयास करने के बाद भी अंगूर का गुच्छा उसके मुह न लगा अंत में निराश और हतास लोमड़ी वापस जाने लगी |

और जाते-जाते लोमड़ी ने अपने मन में यह सोंचकर ही संतोष कर लिया की “शायद ये अंगूर खट्टे है और इसे खाने में इतना मजा नहीं अत जितना मीठे अंगूर को खाने में आता है | इस खट्टे अंगूर को पाने के लिए मैंने व्यर्थ ही अपना समय और ताकत बर्बाद कर दिया |

Short Moral Stories in Hindi शिक्षा :- मुर्ख व्यक्ति इच्क्षित वस्तु न मिलने पर अक्सर उसकी बुराई करने लगते है|


मेढ़क और हांथी का बच्चा 

एक बार की बात है एक जंगल के बीचों-बीच बहुत बड़ा तलाब था उसमे एक मेढ़क और उसके बच्चे रहते थे |

वह मेढ़क हर चीज को खा जाता था इसलिए वह बहुत तगड़ा हो गया था और उसे इस बात पे बहुत घमंड था उसे लगता था वही इस संसार का सबसे बड़ा और प्राणी है |

एक दिन मेढक के बच्चों ने एक बहुत बाद जानवर को तलाब के पास देखा और उसने सोंचा की हो न हो ये ही इस संसार का सबसे बड़ा प्राणी है | वह एक हांथी का बच्चा था |

मेढक के बच्चों ने ये बात जाकर अपने पिता को बताई | मेढ़क ने सोंचा की वह मुझसे भी बड़ा कैसे हो सकता है इस संसार का मैं ही सबसे बड़ा प्राणी हूँ तो ये मुझसे भी बड़ा कैसे हो सकता है |

मेढ़क ने लम्बी साँस ली और खुद को फुलाया और अपने बच्चो से पूछा – “क्या वो इतना बड़ा था ?” बच्चों ने कहा – “नहीं पिता जी वो इससे भी ज्यादा बड़ा था” |

मेढ़क एक बार फिर लम्बी साँस ली और खुद को पहले से ज्यादा फुला लिया और फिर पूछा – “बच्चो क्या वो इतना बड़ा था?” बच्चों ने एक बार फिर जवाब दिया – “नहीं पिता जी वो इससे भी बड़ा था” |

मेढ़क ने एक बार फिर पहले से ज्यादा गहरी और लम्बी साँस लेना शुरू किया और ख़ुद को फुलाता गया-फुलाता गया और स्वयं ही फट गया |

Short Moral Stories in Hindi शिक्षा :- मुर्ख व्यक्ति घमंड और अहंकार में अपना ही सर्वनाश करता है |


कछुए और खरगोश की कहानी 

सुदूर प्रदेश में माधवपुर नाम का एक जंगल था वह सभी जंगली जानवर बहुत ख़ुशी ख़ुशी रहते थे उसी जंगले में एक खरगोश रहता था वो बहुत तेज दौड़ता था लेकिन उस खरगोश को अपनी तेज रफ्तार दौड़ पर बहुत घमंड था |

एक दिन उस खरगोश ने जंगल के सभी अन्य जानवरों को चुनौती दी की इस जंगल में कोई ऐसा मर्द नहीं है जो मुझे दौड़ में हरा सके | इस चुनौती को सुनकर एक कछुआ सामने आया और उसने खरगोश की ये चुनौती स्वीकार की |

कछुए की चुनौती लेने से खरगोश बहुत खुश हो गया और उसे चिढाने लगा “मेरे भोले कछुए भाई तुम बहुत अच्छा मजाक क्र लेते हो लगता है आज मैं हंस हंस के पागल हो जाऊंगा… क्या सच में तुम दौड़ोगे मेरे साथ” |

कछुए ने कहा हाँ मैं ही दौड़ लगाऊंगा तुम्हारे साथ कल मैदान में मिलना |

नियमित समय और अगले दिन दौड़ शुरू करायी गयी जंगल के सभी छोटे बड़े जानवर दौड़ देखने के लिए एकत्रित हुए थे | जैसे ही दौड़ शुरू हुई खरगोश तेजी से भागना शुरू कर दिया और देखते ही देखते सबकी आँखों से ओझल हो गया |

वही कछुए ने अपनी धीमी गति से दौड़ की शुरुवात की | कुछ देर बाद खरगोश ने पीछे मुड़कर देखा तो उसे कछुआ कंही नजर नहीं आया फिर उसने सोंचा की क्यों न मैं कुछ देर आराम कर लूँ और खरगोश एक वृक्ष के निचे आराम करने लगा |

कुछ ही देर में खरगोश की आंख लग गयी और वो गहरी नींद में सो गया | वही दूसरी तरफ कछुआ अपनी धीमी गति से बिना रुके दौड़ को जारी रखा और खरगोश को वृक्ष के निचे सोता छोड़ वह दौड़ जीत गया | और खरगोश हार गया और उसका घमंड चूर-चूर हो गया |

Short Moral Stories in Hindi शिक्षा :- प्रयत्न करने से हर असंभव कार्य को समभ किया जा सकता है |


चूहे और साधू की कहानी ( Short Moral Stories )

एक जंगल में एक साधू तपस्या क्र रहा था तभी उसे किसी के चीखने की आवाज सुनाई दी साधू ने अपने आंख खोलकर देख तो एक बिल्ली एक चूहे को खदेड़ रही थी |

साधू ने अपना कमंडल निकाला और अपनी अलौकिक शक्ति की मदद से उस चूहे को एक बिल्ली में बदल दिया |

फिर साधू ने अगले दिन देखा की उसके द्वारा बनाये गये बिल्ली को एक कुत्ता दौड़ा रहा है और वो बिल्ली अपनी जान बचाने के लिए यहाँ से वहां और वहां से यहाँ भाग रही है |

इस बार साधू ने कमंडल का जल निकाला बिल्ली पे दे छिड़का और देखते ही देखते बिल्ली एक कुत्ता बन गया |

इसे भी पढ़े – Christmas Horror Story In Hindi 2020 | भूतिया कहानी

कुछ दिन बाद साधू ने देखा की उसके द्वारा बनाये गये कुत्ते को एक शेर ने उसपर हमला किया है फिर उसने उस कुत्ते को शेर बना दिया |

जंगल के सभी जानवर उस शेर को देखकर बहुत डरते थे और उस शेर को बहुत ही आसानी से अपना खाना भी मिल जाता था उसकी ज़िन्दगी बहुत मजे से गुजर रही थी |

कुछ सालों बाद उस शेर ने उसी साधू को जंगल में देखा और सोंचा की अगर ये साधू जीवित रहेगा तो ये और भी जानवर को शेर बना सकता है फिर मेरा जीवन खतरे में आ जायेगा इसलिए क्यों न मैं इस साधू को ही अपना भोजन बना लूँ |

साधू ने शेर के दिमाक में चल रहे चाल को समझ गया और उसने अपनी कमंडल का जल उस शेर पे दे मारा और वो शेर फिर से एक छोटा सा चूहा बन गया |

Short Moral Stories in Hindi शिक्षा :- ईश्वर ने जिसको जैसा बनाया है वो उसके लिए सही है |


शेर और चूहे की दोस्ती ( Short Moral Stories )

एक जंगल में एक बब्बर शेर रहता था वो बहुत ही ताकतवार था | एक दिन जब वो आराम कर रहा था तो एक चूहा उसके पास आया और उसकी पेट में कूदने लगा | उसे यह करके बहुत मजा आ रहा था |

कुछ देर बाद शेर की नींद खुल गयी और चूहे को अपने पेट में कूदता देख उसको बहुत गुस्सा आया और उसने चूहे हो को अपने पंजे में दबोच लिया और बोला – “ये नन्हे चूहे क्या तुझे मझसे डर नहीं लगता”

चूहे ने जवाब दिया – “महराज आप तो हमारे राजा हो और राजा से डर कैसा राजा तो सदेव प्रजा के हितैसी होते है”

राजा को चूहे की ये बात भा गयी और उसने चूहे से अपना पंजा हटा दिया और कहा जाओ कंही और जाकर खेलो | कुछ दिन बाद उस जंगल में कुछ शिकारी आये और उसने राजा को जाल में फंसा दिया |

तभी उस नन्हे चूहे ने राजा की मदद की और जाल को अपनी दांतों से कांट कर राजा को जाल से बहार निकाला | राजा उस नन्हे चूहे की बहदुरी से बहुत प्रसन्न हुए और उन्हें सभी प्रजा के बिच सम्मानित किया |

Short Moral Stories in Hindi शिक्षा :- कभी भी किसी को उसकी रुपरेखा से नहीं भापना चाहिए जो कार्य एक छोटा सुई कर सकता है वो तलवार नहीं और जो कार्य तलवार कर सकता है वो सुई नहीं |


उम्मीद करते है दोस्तों आपको हमारे द्वारा दी Short Moral Stories in Hindi का हिंदी संस्करण पसंद आया होगा अगर और भी ऐसी ही Short Moral Stories पढ़ना चाहते है तो हमारे साथ जुड़े रहिये हम आपके लिए और भी ऐसी Short Moral Stories लाते रहेंगे |

Leave a Reply

Top