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Moral Story in Hindi | घूँघट वाली बहू

Moral story in hindi

हेल्लो दोस्तों आज हम आप सभी के लिए दो कहनियाँ लेकर आये है ये दोनों Moral Story in Hindi आपको बहुत पसंद आयेगी और इससे आपको कुछ सीखने को अवश्य ही मिलेगा | पहली कहानी का सारांश की बात करें तो इससे आप जानेंगे हमें कभी किसी का तिरिस्कार नहीं करना चाहिए क्या पता भविष्य में वही हमारा सबसे बड़ा ढाल बने |

चलिए दोस्तों इस कहानी की शुरुवात करते है और पढ़ते है Moral Story in Hindi


Moral Story in Hindi ( घूँघट वाली बहू )

गीतिका की जन्म से ही नाक नहीं थी लेकिन यह बात उसके परिवार के अलावा और किसी को पता नहीं थी। काशिका के माता पिता उसकी शादी को लेकर बहुत चिंतित रहते थे।

गीतिका की माँ – इस लड़की ने भगवान का क्या बिगाड़ा था जिसकी नाक ही नहीं है। अब इसकी शादी कैसे होगी।

गीतिका का भाई – मां इसके लिए कोई नाख्कट लड़का ही ढूंढना पड़ेगा। हा हा हा….

गीतिका के पिता – शादी की कोई चिन्ता नहीं है। राम स्वरूप अपने लड़के की शादी करना चाहता है उसे बस पाँच लाख रूपये चाहिए। लड़की कैसी भी हो शादी कर लेगा

गीतिका की माँ – और उनके लड़के ने कोई कमी निकाली तो

गीतिका के पिता – उनका लड़का अपने पिता से बहुत डरता है। उसकी अपने पिता की मर्जी के आगे कुछ हिम्मत नहीं है। एक बार शादी हो गई तो हो गई |

अगले दिन रामलाल अपने लड़के के साथ गीतिका के घर आया गीतिका ने अपना पूरा मुंह ढक रखा था |

रामलाल – भाई साहब पाँच लाख रुपये दे रहे हैं तो रिश्ता पक्का समझों। मुझे अभी पाँच लाख की बहुत सख्त जरूरत है इसलिए मैं अपने लड़के की शादी कर रहा हूँ।

रामलाल का बेटा (रोहन) – पिताजी मैं एक बार लड़की का चेहरा दिखना चाहता हूँ।

रामलाल – तेरा दिमाग ठीक नहीं है क्या तुझे दिख नहीं रहा कि लड़की बहुत शर्मीली है और हमें ऐसी ही सीधी साधी शर्मीली लड़की चाहिए। मेरी शादी हुई थी तो मैंने भी तेरी मां को देखा नहीं था |

गीतिका की राम स्वरूप के लड़के रोहन से शादी हो जाती है। गीतिका अपनी ससुराल में हमेशा घूंघट डाले रहती रोहन जब भी उसका घूंघट हटाना चाहता तो वह किसी ना किसी काम के बहाने उठ कर चली जाती।

रोहन – गीतिका आज घर में कोई नहीं है आज तो अपना चेहरा दिखा दो।

गीतिका – पिताजी ज्यादा दूर नहीं गए हैं। यहीं पास की दुकान पर गए हुए हैं। अगर उन्होंने मुझे बिना घूँघट के देख लिया तो बहुत डांटेंगे।

गीतिका जब कुएं पर पानी भरने जाती तो गांव की औरतें उसे टोकती।

औरत – बहू तुझे इस गांव में आए कितने दिन हो गए हैं आज तक किसी ने तेरा चेहरा नहीं देखा। इतना भी क्या शर्माना।

गीतिका – वो… बहू हूँ खुला मुंह लेकर थोड़ेना घुमुंगी। मेरे माता पिता ने मुझे बेशर्मों की तरह घूमना नहीं सिखाया।

गांव के लोग रोहन को चिढ़ाते…

गाँव का एक आदमी – अरे रोहन भैया इस जनम में अपनी पत्नी का चेहरा देख पाएंगे या नहीं देख पाओगे। हा हा हा…

गाँव का दूसरा आदमी – भाई मुझे तो लगता है कि दाल में कुछ काला है तभी तो बहू अपना चेहरा नहीं दिखाती। वरना इतने दिनों तक कोई अपना चेहरा क्यों छुपाकर रखेगा।

गांव वालों की बातें सुनकर रोहन को भी शक होने लगा।

रोहन – आज मैं घर जाकर गीतिका का घूंघट उठाकर ही रहूंगा।

रोहन उस रात सोने का नाटक करता है लेकिन सोता नहीं है। जब उसने देखा कि गीतिका गहरी नींद में सो गई है तो रोहन ने गीतिका का घूंघट हटाया। रोहन के पैरों तले से जमीन खिसक गई।

रोहन – अरे इसकी तो नाक ही नहीं है इसके घर वालों ने मुझे धोखा दिया।

रोहन अगले दिन सारी बात अपने पिताजी को बताता है।

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रोहन – पिताजी मेरी शादी एक बिना नाक वाली लड़की से हो गई। गीतिका के परिवार ने हमें धोखा दिया।

रामलाल – अरे तुझे उसकी नाक से क्या लेना देना। मैंने गीतिका के पिता से जो पैसे लिए थे वह अब खर्च भी हो चुके हैं। अब जैसी भी बहू है उसी के साथ रह। वैसे तू कोई काम धंधा तो करता नहीं है। तेरी शादी हो गई यही बहुत है वरना कौन तुझ जैसे लड़के के लिए पाँच लाख देगा।

रोहन ने अपने पिताजी की बात का विरोध नहीं किया लेकिन उसने मन में ठान लिया कि वह गीतिका से कोई नाता नहीं रखेगा।

गीतिका – मैंने खाना लगा दिया है खा लीजिये

रोहन – मुझे नहीं खाना जाकर कूड़ेदान में फेंक दो।

धीरे – धीरे बात गांव में फैल गई कि रोहन की पत्नी की नाक नहीं है।

रोहन का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया क्योंकि वह जब भी घर से बाहर जाता तो लोग उसका मजाक बनाते।

एक औरत – रोहन तुम्हारी पत्नी जरूर पिछले जन्म में रावण की बहन शूर्पणखा रही होगी। हा हा हा…

एक औरत – फूटे भाग्य तुम्हारे जो तुम्हें नकटी पत्नी मिली। मैंने अपने लड़के की शादी की है बहुत सुंदर बहू आई है हमारे घर में।

जब रात में रोहन घर पहुंचा तो गीतिका उससे बोली

गीतिका – मैं आपसे माफी मांगती हूं। मेरी नाक नहीं है लेकिन मुझे नौकर की तरह अपने घर रख लो। मैं आपकी पूरी सेवा करूंगी। मुझे दो वक्त का खाना दे देना। बस मैं आपके कमरे में भी नहीं आऊंगी। कहीं भी बाहर कोने में पड़ी रहूंगी।

रोहन – मेरी नजरों से दूर हो जाओ नफरत होती है मुझे तुम्हारी शक्ल देखकर |

गीतिका घर छोड़कर चली जाती है। कुछ दिनों बाद पूरी दुनिया में एक भयानक महामारी फैली महामारी का कीटाणु नाक के जरिये शरीर में प्रवेश करता था। रोहन और उसका परिवार भी महामारी की चपेट में आ गया। गीतिका की नाक नहीं थी इसलिए वह बच गई। राशिका को जब पता लगा कि रोहन बीमार है तो वह तुरंत अपनी ससुराल पहुंच गई। उसने रोहन और उसके पूरे परिवार की बहुत सेवा की। साथ में गांव के लोगों की भी महामारी के दौरान सेवा की। कुछ महीनों बाद रोहन स्वस्थ हो गया।

रोहन – मुझे माफ करना गीतिका मैंने तुम्हें घर में रहने की जगह भी नहीं दी और तुमने मेरी इतनी सेवा की।

गीतिका – माफी तो मुझे और मेरे घरवालों को मांगनी चाहिए क्योंकि मैंने अपना चेहरा दिखाए बिना ही आपसे शादी कर ली।

गांव का सरपंच गीतिका को पुरस्कृत कहते हैं क्योंकि उसने महामारी के दौरान लोगों की मदद की थी। रोहन अब गीतिका के साथ खुशी खुशी रहने लगा क्योंकि वह समझ गया कि जो भी होता है अच्छे के लिए ही होता है। अगर बाकी लोगों की तरह गीतिका की भी नाक होती तो वह भी बीमार पड़ जाती और उसकी देखभाल करने के लिए कोई नहीं होता।

इस कहानी की नैतिक शिक्षा ( Morality of the Story )

इस Moral Story in Hindi कहानी से मुझे यह शिक्षा मिलती है की हमें कभी किसी को निच नहीं समझना चाहिए और तन तन की सुन्दरता से कंही ज्यादा मायने रखती है मन की सुन्दरता | जिस व्यक्ति का मन सुन्दर है वह व्यक्ति ही सर्वश्रेष्ठ है |

इस कहानी से आपको क्या नैतिक शिक्षा मिलती है हमें कमेंट करके जरुर बताये |

 


Best Moral Story In Hindi ( मूंछ वाली शरारती बिंदिया की कहानी )

15 साल की बिंदिया अपने माता पिता के साथ रामपुर गांव में रहती थी।

बिंदिया के पिता जैसे ही ड्यूटी से लौटते हैं वह उनकी साइकिल छीन लेती और गांव में घूमने निकल पड़ती।

बिंदिया के पिता – बिंदिया कहां जा रही हैं ?

बिंदिया – कहीं नहीं पिताजी। बस गांव का चक्कर लगाकर आती हूं |

बिंदिया अपनी शैतानियों के लिए ही पूरे गांव में फेमस थी जब वो साइकिल से गांव का चक्कर लगाने निकलती तो बहुत लोगों को परेशान करती।

गाँव का एक आदमी – अरे मेरे बाल कौन ले गया।

बिंदिया – हा हा हा… हरि चाचा टकलू है

गाँव की एक औरत – हाय राम मेरी मटकी फोड़ दी आज तेरे बाप से शिकायत करूंगी

बिंदिया – हा हा हा… आज मैंने बारवा मटका फोड़ा

गाँव की एक लड़की – अरे मेरा थैला उसमे मेरा नया सलवार सूट है

बिंदिया – निकल ले… ये सूट तो मेरे ऊपर अच्छा लगेगा।

बिंदिया जब घर पहुंचती तो उसके घर शिकायत करने वालों की भीड़ लगी होती।

गाँव का एक आदमी – रामरतन बिंदिया से इसी समय मेरे बाल दिलवाओ

गाँव की एक औरत – उसने मेरा मटका फोड़ दिया। मटके के पैसे दो।

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गाँव की एक लड़की – चाची इसने मेरा सूट छीन लिया सूट दिलवाओ उससे

बिंदिया की माँ – तुम लोग कितने बेशर्म हो इन बुलाए मेहमानों की तरह मेरे घर चले आते हों जाओ ले लो अपना अपना सामान |

बिंदिया की माँ – लड़की तू इन गांव वालों को क्यूं परेशान करती है। गांव की लोग तुझे बुरी बुरी बददुवाए देकर जाते हैं। अपनी शरारते करना छोड़ते बेटा

बिंदिया – अरे मां तुम तो बहुत डरपोक हो को दुवाओ बद्दुवाओ से कुछ नहीं होता।

एक दिन गांव में एक बहुत पहुंचे हुए साधु आते हैं गांव के सभी लोग उनके दर्शन करने जाते हैं और उनका आशीर्वाद लेकर आते हैं। साधू बाबा हर रोज तपश्या किया करते थे ।

तपस्या करते समय उन्हें कोई डिस्टर्ब नहीं करता था। साधु बाबा को देखकर बिंदिया को शरारत सूझती है। एक सुबह जब साधु बाबा तपस्या कर रहे थे तब बिंदिया उनके पास जाकर जोर से उनकी मूंछ खींच देती हैं और हंसने लगती हैं।

बिंदिया – हा हा हा …

साधू बाबा को भयानक गुस्सा आ जाता है…

साधू बाबा – ऐ मूर्ख लड़की तूने मेरी मूंछ खीचकर मेरा मजाक उड़ाया जा मैं तुझे श्राप देता हूँ जैसे जैसे तू बड़ी होगी तेरी मूंछ आ जाएगी और फिर पूरी दुनियां तेरा मजाक उड़ाएंगी।

साधू बाबा बिंदिया को श्राप देकर चले जाते हैं। बिंदिया जैसे जैसे बड़ी हुई उसकी मूंछ जगने लगी अगर बिंदिया मशीन से मूंछ साफ करती तो कुछ दिनों बाद और भयंकर मूंछ आ जाती।

बिंदिया कहीं भी जाती उसे मुंह पर रूमाल बांधकर जाना पड़ता वरना लोग उस पर हंसते। एक दिन जब बिंदिया बाजार में सब्जियां खरीद रही थीं तो दो लड़कियां उसके पास आती हैं और उसके मुंह से रूमाल हटा देती।

एक लड़की – क्यों रे मूंछ वाली बिंदिया यह मुह छुपाकर क्यों घूम रही है। पहले तो हमें बहुत परेशान किया करती थी अब तेरा रुमाल नहीं मिलेगा चल निकल ले यहाँ से हा हा हा …

लड़कियां बिंदिया का रुमाल लेकर चली जाती है बिंदिया जब घर की तरफ लौट रही थी तो गांवों के लोग बिंदिया पर खूब हंसते हैं।

एक औरत – सिर के बाल कटवा ले और दाढ़ी उगा ले बिंदिया फिर तू कटप्पा की तरह दिखेगी हा हा हा…

एक लड़की – अरे ओ मूंछ वाली अब तेरी शादी तो होगी नहीं चल मुझसे ही शादी कर ले। हा हा हा…

बिंदिया घर पहुँचकर अपनी मां से कहती है

बिंदिया – मां मैं उस साधु बाबा को ढूंढने जा रही हूं जिसने मुझे यह श्राप दिया था

बिंदिया की माँ – बेटी सात साल बीत चुके हैं अब तू उन्हें कहां ढूंढेगी

बिंदिया – चाहे वे दुनिया के किसी भी कोने में हो मैं उन्हें ढूंढकर ही रहूंगी।

बिंदिया साधू को ढूंढने निकल पड़ती है। बिंदिया पड़ोस के गांव में साधू के बारे में पूछती है लोग उसे बताते हैं कि साधु अयोध्या गए हुए हैं। जब बिंदिया अयोध्या पहुंचती है तो पता लगता है कि साधू बाम्बे पहुँच चुके है।

बिंदिया ट्रेन से बाम्बे पहुंचती है लेकिन साधू उसे वहां भी नहीं मिलते। लोग उसे बताते हैं कि साधू उत्तर प्रदेश के किसी गांव में गए हुए हैं बिंदिया के पास पैसे खत्म हो चुके थे और खाने को भी कुछ नहीं बचा था बिंदिया पैदल यात्रा करती हुई उत्तर प्रदेश की ओर निकल पड़ती।

चलते चलते वो उत्तर प्रदेश के एक गांव में पहुँच जाती है और भूख और प्यास व गर्मी से चक्कर खाकर गिर पड़ती है। उस गांव का एक लड़का उसे उठाकर अपने घर लेकर जाता है।

लड़का – मां ये देखो एक लड़की जिसकी मूंछ है।

लड़का बिंदिया के ऊपर पानी के छींटे मारता है तब उसे होश आ जाता है।

लड़का – तुम कौन हो और यहां किस उद्देश्य से आई हो।

बिंदिया – मैं एक साधू की तलाश में हूं जिन्होंने मुझे सात साल पहले श्राप दिया था।

लड़के का माँ – बेटी वो साधु बाबा तो अभी कुछ दिन पहले ही इसी गांव में मर गए।

बिंदिया रोने लगती है और कहती है

बिंदिया – नहीं ऐसा नहीं हो सकता। अब मेरी मूंछ कभी खत्म नहीं होगी।

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लड़के की माँ – बेटी तुझे रोने की जरूरत नहीं। साधु बाबा ने गांव में तेरी चर्चा की थी। उन्हें अफसोस था कि क्रोधवश उन्होंने एक लड़की को जीवन भर के लिए श्राप दे दिया | इसलिये अपना कमंडल छोड़कर गये है जिसके जल से तू श्राप मुक्त हो जाएगी।

औरत गांव के मंदिर से साधु का कमंडल ले कराती है और बिंदिया पर कमंडल के जल की छींटे मारती है जिससे बिंदिया की मूंछ हमेशा के लिए गायब हो जाती है।

लड़के की माँ – बेटी तू तो बहुत ही सुन्दर है मेरे बेटे से ब्याह करेगी

बिंदिया – ये तो मेरा सौभाग्य होगा

बिंदिया ब्याह करती है और अपने गांव जाकर अपने माता पिता से मिलती हैं। बिंदिया के माता पिता बिंदिया को श्राप मुक्त हुआ देखकर बहुत खुश होते हैं।

इस कहानी की नैतिक शिक्षा ( Morality of the Story )

इस Moral Story in Hindi कहानी से मुझे यह शिक्षा मिलती है की हमें कभी भी अपनी ख़ुशी के लिए दुसरों को परेशान नहीं करना चाहिए क्यूंकि इसका परिणाम हमेशा ही भयंकर साबित होता है | अगर बिंदिया अपनी शरारत के लिये साधु बाबा को परेशान नहीं करता तो उसे इतना भयकर श्राप का सामना नहीं करना पड़ता |

दोस्तों आपको इस Moral Story in Hindi कहानी से क्या सीख मिली हमें कमेंट करके जरुर बताये |


तो फ्रेंड्स आप सभी को हमारी ये कहानी कैसी लगी हमें जरुर बताये साथ ही आपके पास भी कहानी है और अप चाहते है उन्हें लोगों तक पहुँचाना तो आप अपनी कहानी हमें शेयर कर सकते है हम आपकी कहानी लोगों तक पहुंचाएंगे |

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