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अनोखी विजयदशमी | यहाँ पानी में तैरता है रावण और हनुमान जी सच में उड़ते है |

अनोखी विजयदशमी

अनोखी विजयदशमी | यहाँ पानी में तैरता है रावण और हनुमान जी सच में उड़ते है |

अनोखी विजयदशमी – दशहरा में रावण दहन की परम्परा सदियों से चली आ रही है | यह बुराई में अच्छाई की जीत की प्रतिक के तौर पर मनाया जाता है आज ही के दिन भगवान श्रीराम ने रावण और उसके अहंकार का अंत किया था और माता सीता को उनकी बंधक से मुक्ति दिलाया था |


दोस्तों मेरा नाम नरेन्द्र साहू है और आज मैं आपको एक अनोखी विजयदशमी के बारे में बताने वाला हूँ |

दोस्तों आप सभी को पता होगा की नवरात्र के अंतिम दिन को हम विजयदशमी के नाम से जानते है और इसी दिन हम मोह, माया और अहंकार रूपी रावण का भी दहन करते है | हम सभी बहुत ही अच्छी तरह से जानते है की दशहरा का पर्व क्यों और किसलिये मनाया जाता है |

दोस्तों आपने दशहरा दहन की अनेको गाथाये पढ़े होंगे और देखे भी होंगे किस तरह रामलीला का नाट्य रूपांतरण किया जाता है इससे आप भली भाती परिचित होंगे | लेकिन आज मैं आपको एक अनोखी विजयदशमी के रामलीला के नाट्य रूपांतरण के बारे में बताऊंगा जिसे देखने के बाद आप आश्चर्यचकित रह जायेंगे |

विजयदशमी

जी हाँ दोस्तों छत्तीसगढ़ के राजनंदगांव जिला में स्थित एक छोटा सा गाँव है जिसका नाम है ग्राम धीरी यहाँ एक अनोखे तौर पे विजयदशमी मनाया जाता है जिसे देखने के लिए प्रदेश के दूर-दूर इलाके से लोग इक्कठा होते है | यहा 15 से 20 फिट लम्बे लंकापति रावण को ज़मीन पर नहीं खड़ा किया जाता है बल्कि ये रावण तालाब के बीचों – बीच पानी में तैरता रहता है | जी हाँ आप सही पढ़ रहे है यहाँ रावण पानी में तैरता है |

साथ ही साथ यहाँ बजरंगबली भी आकाश में दर्शको के ऊपर से उड़ कर संजीवनी बूटी लाते है मारुती नंदन की यह लीला देख सभी मंत्रमुग्ध हो जाते है और श्रीराम चन्द्र की जय के नारे से पूरा गाँव गूंज उठता है |

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दोस्तों आप ये सोंच रहे होगे की अगर रावण बीच तालाब में तैरता रहता है तो भगवान श्रीरा म उनका वध कैसे करते है | मैं आपको बता दूँ रावण का वध अर्थात दहन करने के लिये श्रीराम जी अग्नि बान का प्रयोग कर दूर किनारे से रावण की नाभि में निशाना लगाते है | और यहाँ लंकापति रावण को अपने वध के भय से सिर हिलाते भी देखा जा सकता है |

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